परिचय

भारत एक विकासशील देश है, जो आर्थिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक विकास के रास्ते पर लगातार अपने कदम बढ़ा रहा है। परिवर्तन की यह प्रक्रिया शैक्षिक परिदृश्य पर अन्योन्य रूप से आश्रित है। जहाँ एक ओर यह सारा विकास बिना शैक्षिक प्रगति के अधूरा है, वहीं इस समूची प्रगति का एक दृढ़ संकेतांक शैक्षिक उन्नयन भी है। ऐसे में, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर विकास की न केवल आवश्यकता बढ़ी है बल्कि उसकी नयी विमाओं के उद्घाटन की भी इस समूचे वातावरण में सक्षम भूमिका निर्धारित हुई है।

भारत के महानगरों और नगरों में उच्च शिक्षा के ज्ञान-केन्द्रों की कमी नहीं रही है। लगभग सभी बड़े विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थापना इन बड़े शहरों में ही हुई है, जबकि भारत जैसे देश की अधिकांशतः जनसंख्या ग्रामीण अंचल में निवास करती है। अतएव, इन ग्रामीण अंचलों के छात्रों को उच्च शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए शासन द्वारा इन ग्रामीण क्षेत्रों में राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना की गयी। इसी क्रम में जनपद प्रतापगढ़ की रानीगंज तहसील में इस महाविद्यालय की अवस्थापना मूर्त रूप ले सकी है।

प्रतापगढ़ का यह अंचल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से अत्यन्त समृद्ध है। राजा अजीत प्रताप सिंह (1628-1682) द्वारा यहाँ दुर्ग निर्माण के बाद इस क्षेत्र को प्रतापगढ़ कहा गया। पवित्र सई नदी के तट पर स्थित बेल्हा देवी के सिद्व मंदिर के कारण इसे बेल्हा प्रतापगढ़ नाम से भी अभिहित किया जाता रहा है। वर्ष 1858 में जनपदों के संगठन के समय इसका मुख्यालय बेल्हा कस्बा नियत किया गया। आज भी इस जनपद के मुख्यालय का लोकप्रिय नाम बेल्हा ही है। इस क्षेत्र की भूमि को पवित्र गंगा और सई जैसी नदियों की नमी का उर्वर स्पर्श प्राप्त है। उत्तर की ओर यह जनपद सुल्तानपुर, दक्षिण की ओर इलाहाबाद, पूर्व में जौनपुर, पश्चिम में फतेहपुर और उत्तरपूर्व में रायबरेली से घिरा हुआ है।

यह भी इस अंचल का विरल सौभाग्य है कि इसे स्वामी करपात्री जी महाराज (1905-1980) जैसे अद्भुत संत व्यक्तित्व की छाया मिली। हिन्दू दर्शनशास्त्र की अद्वैत वेदान्त परम्परा के अप्रतिम विद्वान स्वामी करपात्री जी महाराज इसी जनपद के ग्राम भटनी में जन्मे थे। ऐसे प्रगल्भ व्यक्तित्व के नाम पर वर्ष 2000 में प्रतापगढ़ की रानीगंज तहसील के ग्राम पूरे गोर्साइं में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री राजनाथ सिंह के कर-कमलों द्वारा स्थानीय राजनेता एवं लोकसेवी मा. शिवाकांत ओझा की उपस्थिति में ‘स्वामी करपात्री जी महाराज राजकीय महाविद्यालय’ का लोकार्पण हुआ। तब से निरंतर यह महाविद्यालय अंचल के छात्रों को शैक्षिक उन्नयन की ओर अग्रसर कर रहा है। समृद्व छात्र संख्या एवं तदनुरूप संसाधनों से मण्डित यह महाविद्यालय अपने ऋद्ध अकादमिक वातावरण, अनुशासन और शैक्षिक उपलब्धियों के कारण जनपद में सुपरिचित है।

 


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