प्रतापगढ़जनपद के मुख्य स्तंभ घंटाघर से रायबरेली-जौनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रानीगंज तहसील लगभग 17 किलोमीटर पर स्थित है रानीगंज थाना से जामताली जनपद मार्ग पर 3 किलोमीटर पर लच्छीपुर नामक बाजार है जहां से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर पूरे गोसाई नामक ग्राम अंचल में स्वामी करपात्री जी महाराज राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना की गई है
इसलिए इस महाविद्यालय का निर्माण और भी आवश्यक था ताकि रानीगंज क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण छात्र अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए किसी सरकारी डिग्री कॉलेज में प्रवेश लेकर अपने भविष्य को और बेहतर बना सकें।

किसी भी देश का निर्माण और उसका भविष्य उस देश के नवयुवकों के हाथों में होता है यदि ऐसे नवयुवक अच्छी शिक्षा प्राप्त कर पाने में असफल होंगे तो देश का भविष्य निश्चित ही अंधकार में होगा इसलिए सरकार एवं समाज की न सिर्फ एक नैतिक जिम्मेदारी है बल्कि उज्जवल भविष्य के निर्माण के लिए गांव देहात में ऐसे महाविद्यालयों का निर्माण करना एक मजबूरी भी है।
स्वामी करपात्री जी के नाम से इस महाविद्यालय की नींव सन 1999 में एवं शिलान्यास 2000 में हुआ। स्वामी करपात्री जी का जन्म 1907 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के भटनी कस्बे में हुआ था जो लालगंज तहसील कार्य क्षेत्र में आता है।
वह एक महान संत, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और एक राजनेता भी थे। उन्होंने अपने जीवन काल में अनेक अद्भुत ग्रंथों की रचना की जिसमें वेदार्थ पारिजात, रामायण मीमांसा, विचार पीयूष, मार्क्सवाद और रामराज्य आदि थे।
उनका सपना था कि वह अपने जीवनकाल में ही भारत में राम राज्य को स्थापित होता हुआ देखें जहां पर प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित, सफलऔर सुखी हो।
वे जानते थे कि यह तभी संभव हो पाएगा जब भारत का प्रत्येक नवयुवक अच्छी शिक्षा प्राप्त करके उसको अपने जीवन में धारण कर लेगा।
स्वामी करपात्री जी के इन्हीं आदर्श विचारों को वास्तविक रूप में लाने के लिए इस महाविद्यालय का निर्माण किया गया।
आज का महाविद्यालय स्वामी जी के उसी स्वप्न और अभिलाषा को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।
इस महाविद्यालय में राजनीति शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, हिंदी, अंग्रेजी एवं शारीरिक शिक्षा जैसे विषयों के स्नातक एवं परास्नातक तक की शिक्षा उपलब्ध है।
पूर्व में महाविद्यालय फैजाबाद के राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबंधित था परंतु वर्तमान में या महाविद्यालय इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध हो चुका है।