शिक्षणेतर गतिविधियाँ

क. राष्टीय सेवा योजना:
     महाविद्यालय में विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित राष्टीय सेवा योजना की दो इकाईयां संचालित हैं। प्रत्येक इकाई में 100 विद्यार्थी पंजीकृत होते हैं। सत्र भर चलने वाले एकदिवसीय कार्यक्रमों के अतिरिक्त वर्ष में एक बार सात दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया जाता है जिससे न सिर्फ छात्र-छात्राओं में सेवा की भावना का संचार होता है अपितु विद्यार्थियों का सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास भी इसके माध्यम से सम्भव होता है।

ख. रोवर्स रेंजर्स:
     छात्रों को शारीरिक और मानसिक रूप से दक्ष और आत्मनिर्भर बनाने के लिए महाविद्यालय में रोवर्स एवं रेंजर्स दल का गठन किया जाता है। चयनित छात्र-छात्राओं को आमंत्रित प्रशिक्षकों के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। यह कार्यक्रम छात्र-छात्राओं को सामाजिक-नैतिक रूप से सजग और राष्ट्रसेवी बनाता है।

ग. छात्र कल्याण परिषद:
     छात्र-छात्राओं के बहुमुखी विकास के लिए सत्रपर्यन्त छात्रकल्याण परिषद् द्वारा भाषण, रंगोली, क्विज, निबन्ध आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है एवं सत्रान्त में उन्हें पुरस्कृत भी किया जाता है।

घ. सांस्कृतिक एवं विषय परिषदें:
     छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक अभिरुचि एवं अकादमिक क्षमता के विकास के लिए महाविद्यालय में सांस्कृतिक परिषद एवं विषयों की परिषदों की स्थापना की जाती है जिनके तत्वावधान में गीत संगीत नाटक सम्भाषण निबन्ध आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। छात्र-छात्राओं की इन सांस्कृतिक अकादमिक प्रस्तुतियों को समयानुरूप अभिशंसित और पुरस्कृत किया जाता है।
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाशंकर मिश्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एम.पी.दुबे, संयुक्त शिक्षा निदेशक श्री एम.पी. साहनी सहित अनेक मूर्धन्य व्यक्तित्व एवं राजनेता इस महाविद्यालय में विभिन्न अवसरों पर पधार चुके हैं।

ड. प्रकाशन:
     महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं की साहित्यिक प्रतिभा के प्रस्फुटन एवं महाविद्यालयों की गतिविधियों के समुचित प्रकाशन के लिए महाविद्यालय की मुखपत्रिका ‘ग्राम्या’ का प्रकाशन किया जाता है। ‘ग्राम्या’ में साहित्यिक लेखों, रचनात्मक साहित्य एवं सूचनापरक लेखों के साथ-साथ अन्य ज्ञानवर्द्धक सामग्री का प्रकाशन किया जाता है।

च. आयोजन:
     महाविद्यालय में समस्त राष्ट्रीय पर्वों, महत्वपूर्ण दिवसों एवं वार्षिकोत्सव सहित अन्य कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं व्याख्यानों का आयोजन समय समय पर किया जाता है जिसमें महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता होती है।